नशे की लत: युवाओं और समाज के लिए बढ़ती चुनौती

जागरूकता, परिवार का सहयोग और समय पर उपचार से संभव है नशामुक्त जीवन

नई दिल्ली। नशे की लत आज केवल व्यक्ति की व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि परिवार, समाज और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौती है। शराब, तंबाकू और विभिन्न नशीले पदार्थों का बार-बार सेवन व्यक्ति के शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के साथ-साथ उसके पारिवारिक, सामाजिक और कार्यजीवन को भी प्रभावित कर सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, ड्रग-यूज़ डिसऑर्डर को केवल इच्छाशक्ति की कमी या “बुरी आदत” मानना उचित नहीं है; यह जैविक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक कारकों से जुड़ी एक स्वास्थ्य समस्या हो सकती है, जिसका उपचार और पुनर्वास संभव है।

युवाओं पर विशेष ध्यान जरूरी

किशोरों और युवाओं में साथियों का दबाव, तनाव, जिज्ञासा, गलत संगति और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां नशे की शुरुआत के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। इसलिए परिवार और शिक्षण संस्थानों की भूमिका केवल नशे से होने वाले नुकसान की जानकारी देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि युवाओं को सकारात्मक वातावरण, संवाद और आवश्यक मानसिक स्वास्थ्य सहायता भी उपलब्ध करानी चाहिए।

नशे की लत के संकेतों को पहचानें

किसी व्यक्ति में नशे की निर्भरता विकसित होने पर नशे की तीव्र इच्छा, सेवन पर नियंत्रण में कठिनाई, नशे को अन्य गतिविधियों से अधिक प्राथमिकता देना और नुकसान होने के बावजूद सेवन जारी रखना जैसे संकेत दिखाई दे सकते हैं।

परिवार को अचानक व्यवहार में बदलाव, पढ़ाई या काम में गिरावट, सामाजिक दूरी, आर्थिक समस्याओं तथा नशे के लिए लगातार धन की मांग जैसे संकेतों को गंभीरता से लेना चाहिए। हालांकि, ऐसे संकेतों के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं; इसलिए बिना विशेषज्ञ सलाह के किसी व्यक्ति पर आरोप लगाने से बचना चाहिए।

डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी की अपील

डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी, हेल्थ एक्सपर्ट, ने कहा, “नशे की लत को शर्म या अपराधबोध से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और मानवीय दृष्टिकोण से समझने की आवश्यकता है। व्यक्ति को अकेला छोड़ने या उसका सामाजिक बहिष्कार करने के बजाय परिवार को उसके साथ खड़ा होना चाहिए और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध करानी चाहिए।”

उन्होंने कहा कि नशा छोड़ने की कोशिश कर रहे व्यक्ति को अचानक दवा बंद करने या स्वयं उपचार करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए। विशेष रूप से कुछ पदार्थों की निर्भरता में withdrawal गंभीर हो सकता है और विशेषज्ञ निगरानी की आवश्यकता पड़ सकती है। WHO भी नशा-संबंधी विकारों के लिए प्रमाण-आधारित उपचार और व्यापक देखभाल को महत्वपूर्ण मानता है।

नशामुक्ति के लिए समाज की भागीदारी जरूरी

नशे की रोकथाम के लिए परिवार, स्कूल-कॉलेज, स्वास्थ्यकर्मी, सामाजिक संस्थाएं और स्थानीय समुदाय मिलकर काम कर सकते हैं। युवाओं को खेल, शिक्षा, कौशल विकास, रचनात्मक गतिविधियों और स्वस्थ सामाजिक वातावरण से जोड़ना भी महत्वपूर्ण है।

भारत में “नशा मुक्त भारत” जैसे जन-जागरूकता प्रयासों का उद्देश्य युवाओं और समुदायों को नशीले पदार्थों के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना और नशामुक्त जीवन के लिए प्रेरित करना है।

संदेश स्पष्ट है

नशे से दूरी बनाएं, परिवार से संवाद बढ़ाएं और समस्या होने पर समय पर विशेषज्ञ सहायता लें।

नशा छोड़ना कमजोरी नहीं—एक साहसिक और सकारात्मक निर्णय है।
— डॉ. विवेक कुमार त्रिपाठी

हेल्थ एक्सपर्ट

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