​सावधान! ग्रेटर नोएडा वेस्ट में किडनैपिंग की कोशिश: 10 साल की मासूम ने 'कॉल' वाले जाल को अपनी सूझबूझ से तोड़ा

​ग्रेटर नोएडा वेस्ट | 15 मई, 2026, ग्रेटर नोएडा वेस्ट की कृष्णा सिटी-2 में एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, लेकिन साथ ही एक बच्ची की बहादुरी ने यह भी साबित कर दिया कि सही शिक्षा और जागरूकता किसी भी अपराध को विफल कर सकती है। मीडियाकर्मी मनोहर सिंह की 10 साल की बेटी वर्तिका ने अपनी हाजिरजवाबी और निडरता से अपहरणकर्ताओं के मंसूबों पर पानी फेर दिया।



​क्या थी पूरी घटना?

​एनपीएस स्कूल में कक्षा 5 की छात्रा वर्तिका स्कूल की छुट्टी के बाद घर लौट रही थी। तभी एक नकाबपोश व्यक्ति ने उसे रोका और दावा किया कि उसके पिता ने उसे लेने भेजा है। जब बच्ची नहीं मानी, तो आरोपी ने 'फेक कॉल' का सहारा लिया और किसी अजनबी से पिता बनकर बात करने को कहा।

​वर्तिका को अपने पिता का नंबर याद था और उसने तुरंत पहचान लिया कि फोन पर आवाज उसके पिता की नहीं है। आरोपी ने दूसरी बार कोशिश की, लेकिन वर्तिका भांप चुकी थी कि दाल में कुछ काला है। बिना डरे, उसने वहां से दौड़ लगा दी और सुरक्षित घर पहुँच गई।



​बहादुरी का आधार: माता-पिता की दी हुई सीख

​इस पूरी घटना में वर्तिका की हिम्मत के पीछे उसके माता-पिता द्वारा समय-समय पर दी गई वह सीख थी, जिसे अक्सर बच्चे हल्के में ले लेते हैं। वर्तिका ने साबित किया कि:

​अजनबियों पर अविश्वास: उसने अनजान व्यक्ति की बातों में आने से मना कर दिया।

​जानकारी का सही उपयोग: उसे अपने पिता का मोबाइल नंबर याद था, जिससे वह धोखे को पहचान सकी।

​त्वरित निर्णय (Quick Reflex): खतरे को भांपते ही उसने शोर मचाने या बहस करने के बजाय वहां से भागना बेहतर समझा।

​अभिभावकों के लिए जरूरी हिदायत: सतर्कता ही सुरक्षा है

​यह घटना हर माता-पिता के लिए एक 'वेक-अप कॉल' है। नोएडा जैसे व्यस्त इलाकों में अपराधी घात लगाकर बैठे हैं। अपने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए इन बातों का खास ख्याल रखें:

​कोड वर्ड (Code Word) तय करें: अपने बच्चे के साथ एक गुप्त 'कोड वर्ड' तय करें। बच्चे को समझाएं कि अगर कोई भी (चाहे वो जान-पहचान का ही क्यों न हो) उसे लेने आए, तो वह पहले वो कोड वर्ड पूछे। अगर सामने वाला कोड वर्ड नहीं बता पाता, तो उसके साथ बिल्कुल न जाए।

​मोबाइल नंबर और पता याद कराएं: बच्चे को माता-पिता का मोबाइल नंबर और घर का पूरा पता रटा हुआ होना चाहिए।

​फेक कॉल से सावधान: बच्चों को बताएं कि अपराधी फोन पर किसी और की आवाज सुनाकर उन्हें डरा या बहला सकते हैं। ऐसे में घबराने के बजाय किसी भीड़भाड़ वाली जगह की ओर भागें।

​न कहने की हिम्मत: बच्चों को सिखाएं कि बड़ों को 'ना' कहना बदतमीजी नहीं है, खासकर तब जब कोई अजनबी उन्हें छूने या साथ ले जाने की कोशिश करे।

​स्कूल और वैन की निगरानी: यदि संभव हो तो स्कूल से वापसी के समय बच्चे को अकेले न आने दें। यदि देरी हो रही है, तो स्कूल प्रशासन या किसी भरोसेमंद पड़ोसी को सूचित करें।

​पुलिस की चुनौती: फिलहाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं। आशंका है कि यह किसी गिरोह का काम हो सकता है।

​निष्कर्ष: वर्तिका की सूझबूझ ने एक परिवार को बिखरने से बचा लिया। आज हर बच्चे को 'वर्तिका' की तरह जागरूक बनने की जरूरत है।

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