बेकार के तर्क - वितर्क हो जहां ,
वहां ख़ामोश रहना अच्छा है l
बेमानी सी बातें हो जहां ,
वहां ख़ामोश रहना अच्छा है l
लोग बस सुनते हो, समझते ना हो जहां ,
वहां ख़ामोश रहना अच्छा है l
उलझनों का बेवजह तांता हो जहां ,
वहां ख़ामोश रहना अच्छा है ।
परेशान करने को अनगिनत सवाल हो जहां ,
खुद के सुकून के लिए, वहां ख़ामोश रहना अच्छा है ।
जब लगे कि आप किसी की चाहत नहीं, ज़रूरत हो ,
वहां ख़ामोश रहना अच्छा है l
सब तुम्हें गलत साबित करने को बैठे हो जहां ,
ख़ुद को सही साबित करने से बजाय,
वहां ख़ामोश रहना अच्छा है l
कोई अपना जब यकीं करने के बजाय हर बात पर शक करे ,
ख़ुद को निर्दोष साबित करने के बजाय, वहां ख़ामोश रहना अच्छा है l
हर वो पल जो बेचैन करके बोलने को मजबूर करे,
यकीं मानो , वहां ख़ामोश रहना अच्छा है।
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| पूर्णिमा रीहिल |
