नई दिल्ली, संदीप द्विवेदी । क्या हमारा समाज सही मायनों में समान है? क्या समानता सिर्फ किताबों और टीवी न्यूज़ तक सीमित है? इन गहरे सवालों का जवाब तलाशने और समाज की सोच बदलने के लिए हाल ही में एक विशेष नाटक "आईना" का मंचन किया गया। 'Yes WE CAN' ग्रुप और 'ब्रिजस्टोन इंडिया' की CSR पहल 'सामर्थ्य' के सहयोग से तैयार यह नाटक दिव्यांगजनों के अधिकारों और उनकी मानवीय गरिमा की एक सशक्त आवाज़ बनकर उभरा है।
नाटक का मुख्य विषय: एक अलग नज़रिया
इस
नाटक की सबसे बड़ी विशेषता इसकी अनूठी कहानी थी। इसमें दिखाया गया कि कैसे एक
दिव्यांग परिवार में एक 'सामान्य'
(Normal) बच्चे का जन्म होता है और उसे समाज
में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। यह कहानी उस भेदभाव और संघर्ष को
दर्शाती है जो दिव्यांगजन स्कूल एडमिशन से लेकर सामाजिक स्वीकृति तक हर मोड़ पर
झेलते हैं। नाटक का संदेश साफ है—"दिव्यांगता शरीर में नहीं, बल्कि समाज की सोच में है।"
ब्रिजस्टोन
इंडिया की 'सामर्थ्य' पहल का मुख्य उद्देश्य दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना है:
- कस्टमाइज्ड
व्हीलचेयर: इस
अभियान के तहत पिछले तीन वर्षों में 200 से अधिक विशेष मोटर चालित (Motorized)
व्हीलचेयर वितरित की गई हैं। ये
कुर्सियाँ हर व्यक्ति की विशिष्ट दिव्यांगता के अनुसार कस्टमाइज की गई हैं।
- कौशल
विकास: सिर्फ
व्हीलचेयर देना ही मकसद नहीं है, बल्कि
मेंटरिंग और स्किल डेवलपमेंट के ज़रिए उन्हें आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनाना
है ताकि वे सम्मान के साथ जी सकें।
साहस और स्वाभिमान की कहानियाँ
नाटक
में भाग लेने वाले कलाकारों ने अपने निजी अनुभव साझा किए। एक कलाकार ने भावुक होते
हुए बताया कि कैसे लोग उन्हें सड़कों पर 'धुतकार'
देते थे, लेकिन
अब वे दुनिया को दिखाना चाहते हैं कि ईश्वर ने उन्हें भी जीने का पूरा हक दिया है।
वहीं, सात किताबों की लेखिका ने बताया कि
कैसे उन्होंने अपने संघर्षों को मात देकर समाज को आईना दिखाया और आज एक सफल लेखिका
के रूप में अपनी पहचान बनाई है।
'Yes WE CAN' ग्रुप के अनुसार, यह
केवल एक समूह नहीं बल्कि एक परिवार है। उनका सपना है कि दिल्ली और पूरे देश में
दिव्यांग व्यक्ति पूरी आज़ादी, सुरक्षा
और सम्मान के साथ कहीं भी आ-जा सकें और अपनी मर्ज़ी से जीवन जी सकें।
निष्कर्ष: 'आईना'
नाटक हमें याद दिलाता है कि जब कॉर्पोरेट सामाजिक
उत्तरदायित्व (CSR) ज़मीनी हकीकत से जुड़ता है, तब वास्तविक बदलाव शुरू होता है। ब्रिजस्टोन
इंडिया और 'Yes WE CAN' की यह साझा कोशिश एक समावेशी (Inclusive)
दुनिया की दिशा में एक सराहनीय कदम है।


