बजट 2026: कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नए युग का आगाज़, वित्त मंत्री की दूरदर्शी पहल

संदीप द्विवेदी

केन्द्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में वित्त वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश कर एक नया इतिहास रचा। यह उनका नौवां बजट था और स्वतंत्र भारत में पहली बार बजट रविवार के दिन पेश किया गया। 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र के साथ इस बजट में आर्थिक विकास और क्षमता निर्माण पर विशेष जोर दिया गया है। इस बार के बजट का सबसे आकर्षक केंद्र रही 'ऑरेंज इकोनॉमी' (Orange Economy), जिसके लिए की गई घोषणाएं देश के लाखों कंटेंट क्रिएटर्स के भविष्य को नई दिशा देंगी।


क्या है 'ऑरेंज इकोनॉमी' और इसका महत्व?

ऑरेंज इकोनॉमी का तात्पर्य उस रचनात्मक क्षेत्र (Creative Sector) से है जिसमें एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग, कॉमिक्स (AVGC) और डिजिटल कंटेंट शामिल हैं।

वित्त मंत्री ने रेखांकित किया कि 2030 तक इस सेक्टर को लगभग 20 लाख कुशल पेशेवरों की आवश्यकता होगी। भारत को ग्लोबल क्रिएटिव हब बनाने के लिए सरकार ने युवाओं को डिजिटल कौशल से लैस करने का संकल्प लिया है।


अनुसंधान और नवाचार को नई पंख

दिल्ली-एनसीआर के युवा वैज्ञानिक और 'सेलेस्टियल एयरोस्पेस' से जुड़े श्रेयांस जैन इस बजट को उत्साही शोधकर्ताओं के लिए एक बड़ा उपहार मानते हैं। श्रेयांस और उनके आईआईटी सहयोगी एक क्रांतिकारी 'बैलून-असिस्टेड रॉकेट लॉन्च सिस्टम' पर काम कर रहे हैं।

इस तकनीक का वैज्ञानिक आधार सरल और प्रभावी है:

एक विशाल गुब्बारा रॉकेट को ऊपरी वायुमंडल (जहाँ वायु प्रतिरोध न्यूनतम होता है) तक ले जाता है। वहां से रॉकेट प्रज्वलित होता है, जिससे ईंधन की भारी बचत होती है। इस विधि से पेलोड ले जाने की क्षमता 2-3 गुना तक बढ़ जाती है। बजट के सहयोग से अब ऐसे कई रिसर्च प्रोजेक्ट्स को नई गति मिलेगी।

श्रेयांस जैन

शिक्षा और प्रशिक्षण: ग्रासरूट स्तर पर तैयारी

बजट में ऑरेंज इकोनॉमी को 'क्रिएटिव जॉब्स का नया इंजन' माना गया है। स्किल गैप को कम करने के लिए सरकार ने निम्नलिखित ठोस कदम उठाए हैं:

  • कंटेंट क्रिएटर लैब्स: मुंबई स्थित 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजीज' (IICT) के सहयोग से देश के 15,000 माध्यमिक स्कूलों और 500 कॉलेजों में अत्याधुनिक लैब्स स्थापित की जाएंगी।
  • स्किल डेवलपमेंट: ये लैब्स छात्रों को वीडियो प्रोडक्शन, एडिटिंग, डिजिटल स्टोरीटेलिंग और XR (एक्सटेंडेड रियलिटी) जैसे आधुनिक टूल्स की ट्रेनिंग देंगी।
  • डिजाइन संस्थान: पूर्वी क्षेत्र (Eastern Region) में एक नया 'नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन एंड डेवलपमेंट' स्थापित किया जाएगा, जो विजुअल डिजाइनिंग के क्षेत्र में क्रांति लाएगा। 

डिजिटल नॉलेज ग्रिड: कंटेंट का खजाना

कंटेंट क्रिएटर्स के लिए एक और महत्वपूर्ण घोषणा 'डिजिटल नॉलेज ग्रिड' का निर्माण है।

  • यह ग्रिड भारत की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संपत्तियों का डिजिटल दस्तावेजीकरण करेगा।
  • यह क्रिएटर्स के लिए एक 'ओपन प्लेटफॉर्म' होगा, जहाँ से वे प्रामाणिक डेटा प्राप्त कर उच्च गुणवत्ता वाली डॉक्यूमेंट्रीज़ और शैक्षिक वीडियो बना सकेंगे।
  • साथ ही, 20 प्रतिष्ठित स्थलों पर 10,000 टूरिस्ट गाइड्स को अपस्किल किया जाएगा, जिससे कंटेंट क्रिएटर्स और पर्यटन क्षेत्र के बीच एक नया तालमेल बनेगा।

वित्तीय प्रोत्साहन और भविष्य की राह

बजट में रचनात्मक क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के लाभ दिए गए हैं:

  1. ₹10,000 करोड़ का आवंटन: क्रिएटिव स्टार्टअप्स की फंडिंग के लिए।
  2. इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट: बड़े शहरों में क्रिएटिव हब्स विकसित करने के लिए म्यूनिसिपल बॉन्ड्स के माध्यम से ₹100 करोड़ का प्रोत्साहन।

प्रो. प्रभांशु ओझा (दिल्ली विश्वविद्यालय) के अनुसार, यह बजट युवाओं को केवल उपभोक्ता नहीं बल्कि 'क्रिएटर' बनाने वाला है। शिक्षा, कौशल और रोजगार का यह त्रिकोण भारत को एक 'क्रिएटिव सुपरपावर' के रूप में स्थापित करेगा और 'विकसित भारत' के विजन को मजबूती देगा।  

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