15 अगस्त: स्वतंत्रता दिवस और शिक्षा के दीप की अनोखी कहानी

किलहनापुर (कुंडा, प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश), ब्रिजेश कुमार।
देशभक्ति और समाज सेवा का संगम
15 अगस्त का दिन हर भारतीय के लिए गर्व और चेतना का दिन होता है। कुंडा के किलहनापुर स्थित यूनाइटेड पब्लिक स्कूल में इस वर्ष का 80वाँ  स्वतंत्रता दिवस समारोह केवल झंडारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के लिए उम्मीद की एक नई किरण लेकर आया।
सुबह से ही प्रांगण में देशभक्ति के गीतों की गूंज थी। बच्चे हाथों में तिरंगा लिए अनुशासित पंक्तियों में खड़े थे। समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा जी के आगमन के साथ ही प्रांगण करतल ध्वनि से गूंज उठा। उनके साथ क्षेत्र के कई अन्य गणमान्य नागरिक भी इस शुभ अवसर की शोभा बढ़ा रहे थे।
जब स्वतंत्रता दिवस पर गूंजी समानता की आवाज
मुख्य अतिथि डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा जी ने ध्वजारोहण कर तिरंगे को सलामी दी। इसके बाद उन्होंने अपने ओजस्वी संबोधन में कहा:
> "सच्ची आजादी तब तक अधूरी है जब तक देश का हर बच्चा कलम और किताब से दूर है। शिक्षा ही वह हथियार है जो गरीबी और अज्ञानता की जंजीरों को काट सकता है।"
उनकी इस बात ने वहां मौजूद हर व्यक्ति के हृदय को छू लिया।
प्रबंधक रामराज विश्वकर्मा जी की अनुकरणीय पहल
समारोह का सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षण तब आया जब स्कूल के प्रबंधक रामराज विश्वकर्मा जी और विजय विश्वकर्मा जी ने मंच संभालते हुए एक ऐतिहासिक घोषणा की।
रामराज विश्वकर्मा जी ने अत्यंत विनम्रता के साथ कहा कि क्षेत्र में कई ऐसे अत्यंत गरीब परिवार हैं जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों को अच्छे स्कूल में नहीं भेज पाते। शिक्षा किसी की मोहताज नहीं होनी चाहिए।
इस अवसर पर प्रबंधन समिति (रामराज विश्वकर्मा जी एवं विजय विश्वकर्मा जी) ने निर्णय लिया कि:
 * अत्यंत गरीब और असहाय परिवारों के बच्चों के लिए निशुल्क शिक्षा की विशेष व्यवस्था की गई है।
 * ऐसे बच्चों को पढ़ाई लिखाई के लिए आवश्यक सुविधाएं और मार्गदर्शन भी बिना किसी शुल्क के दिया जाता है।
विजय विश्वकर्मा जी ने जोर देकर कहा, "कोई भी बच्चा सिर्फ इसलिए अनपढ़ न रह जाए कि उसके पास फीस देने के पैसे नहीं हैं। यूनाइटेड पब्लिक स्कूल हर जरूरतमंद बच्चे के सपनों को उड़ान देने के लिए प्रतिबद्ध है।"
एक नई सुबह की शुरुआत
इस घोषणा के बाद प्रांगण में मौजूद अभिभावकों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल तालियों की गूंज से भर गया। मुख्य अतिथि डॉ. शिव प्रसाद मिश्रा जी ने प्रबंधक द्वय की इस सोच की भूरि-भूरि प्रशंसा की और इसे समाज के लिए एक बड़ा योगदान बताया।
स्वतंत्रता दिवस का यह पर्व किलाहनापुर के लोगों के लिए केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि "अज्ञानता और गरीबी से आजादी" की दिशा में उठाया गया एक ऐतिहासिक कदम बन गया।

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