जीवन में कभी-कभी ऐसी चुनौतियाँ आती हैं जो हमें भीतर तक झकझोर देती हैं, लेकिन उन्हीं मुश्किलों के बीच से जो निखरकर बाहर आता है, वही समाज के लिए मिसाल बनता है। ऐसी ही एक कहानी है शिवानी मित्तल की, जिन्होंने मातृत्व के सुख को पाने के लिए शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक बाधाओं को पार कर एक ऐसी जीत हासिल की, जो किसी चमत्कार से कम नहीं है।
विरासत में मिला प्यार और अचानक आया खालीपन
शिवानी का पालन-पोषण एक बहुत ही स्नेहपूर्ण परिवार में हुआ। लेकिन जीवन ने तब एक कठोर मोड़ लिया जब उनकी माँ का अचानक देहांत हो गया। इस दुख ने शिवानी को समय से पहले परिपक्व बना दिया। उन्होंने अपने पिता का सहारा बनकर और भाई-बहन की जिम्मेदारियों को साझा कर परिवार को फिर से खड़ा किया।
कठिन परीक्षा: IVF और समाज के ताने
साल 2017 से 2019 के बीच शिवानी ने माँ बनने का सपना संजोया, लेकिन यहीं से उनकी असली अग्निपरीक्षा शुरू हुई। ओव्यूलेशन स्कैन से लेकर तीन बार असफल IUI (इंट्रायूटरिन इनसेमिनेशन) तक, हर बार उन्हें निराशा हाथ लगी। इस संवेदनशील दौर में उन्हें संवेदनहीनता का भी सामना करना पड़ा, जहाँ उनके बढ़ते वजन पर किए गए कटाक्षों ने उनके आत्मविश्वास को चोट पहुँचाई। लेकिन शिवानी ने खुद को टूटने नहीं दिया।
ऑपरेशन थिएटर का वह अलौकिक अनुभव
शिवानी ने हार नहीं मानी और IVF का कठिन रास्ता चुना। रोज के इंजेक्शन और हार्मोनल बदलावों के बीच, एक दिन ऑपरेशन थिएटर में उन्हें एक दिव्य अनुभव हुआ। उन्होंने एक शांत सफेद रोशनी देखी, जिसमें उन्हें अपनी माँ की उपस्थिति महसूस हुई। उस रोशनी ने उनसे कहा— "तुम्हें अभी जीना है... तुम्हें माँ बनना है।" उस पल ने शिवानी को एक ऐसी आंतरिक शक्ति दी, जिसने उनके सारे डर को अटूट विश्वास में बदल दिया।
आदिया: जीवन की सबसे बड़ी खुशी
साल 2022 में शिवानी की दुनिया फिर से रौशन हुई जब उनकी बेटी 'आदिया' का जन्म हुआ। शिवानी कहती हैं कि आदिया की हंसी में उन्हें अक्सर अपनी माँ की झलक दिखाई देती है। आज शिवानी एक समर्पित माँ के रूप में अपनी बेटी की हर ज़रूरत का ध्यान रखती हैं—स्कूल छोड़ने से लेकर उसके बेहतर भविष्य की नींव रखने तक।
प्रेरणा का संदेश
शिवानी मित्तल की यह यात्रा हर उस महिला के लिए संदेश है जो खुद को कमजोर महसूस करती हैं:
अपनी अंतरात्मा की सुनें: जब मन कहे कि आगे बढ़ना है, तो पीछे मुड़कर न देखें।
हार न मानें: विज्ञान और विश्वास का संगम असंभव को भी संभव बना सकता है।
खुद को मजबूत रखें: समाज की बातों से ज्यादा आपकी अपनी हिम्मत मायने रखती है।
'द वूमानिया टाइम्स' शिवानी मित्तल के इस अद्भुत धैर्य और मातृत्व के प्रति उनके समर्पण को नमन करता है। उनकी कहानी यह साबित करती है कि एक औरत अगर ठान ले, तो वह नियति की लकीरों को भी बदल सकती है।
