"धरती का मेरा स्वर्ग"(घर)
नहीं मात्र वह चार दीवार,
वह था मेरे खुशियों का भंडार,
उस चार दीवार में बस्ती मेरी जान,
घर मेरा है मेरा जहान,
छोटा सा मेरा घर,
जहां सारे दुःख जाऊं, मैं भूल
जहां मेरी सारी परेशानियां हो जाए गुल,
जहां मेरे सारे गम हो जाए कम,
जहां मेरे शत्रु मुझे लगे भगवान,
जहां से हूं मैं आया ,
जहां मैं वापस जाऊंगा,
छोटा सा मेरा आंगन,
जहां चिड़िया रोज चहकती,
उस चार दीवार में बस्ता था मेरा परिवार,
उस चार दीवार में बस्ती मेरी मां,
जिसने मुझे दुनिया दिखलाई,
उस चार दीवार में बस्ते मेरे पिताजी,
जिन्होंने मुझे चलना सिखाया,
उस चार दीवार में बस्ते थे मेरे भईया,
जिन्होंने मुझे मुश्किलों से लड़ना सिखलाया,
उस चार दीवार में बस्ती थी मेरी बहन,
जिसने मुझे दुआओं का महत्व समझाया,
उस चार दीवार में बस्ता था मेरा संसार,
जिसने मुझे धरती पर स्वर्ग का एहसास करवाया,
यह है मेरा परिवार ,
यह है मेरे धरती का स्वर्ग,
जिसे मैंने घर नाम से बतलाया ,
देवी सिंह राजपूत
राजस्थान जालौर (सांचौर) अचलपुर।। |
