‘काव्य-तीर्थ’: आस्था और साहित्य का संगम, 108 तीर्थों की काव्यात्मक परिक्रमा

पुस्तक समीक्षा

भारतीय साहित्य जगत में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को समर्पित एक नई, महत्वपूर्ण कृति का पदार्पण हुआ है—'काव्य-तीर्थ: 108 पवित्र स्थलों की आध्यात्मिक यात्रा'। लेखक नीरज कुमार वर्मा द्वारा रचित यह ग्रंथ न केवल एक कविता संग्रह है, बल्कि यह सनातन संस्कृति के 108 पावन तीर्थों की भावनाओं, इतिहास और आस्था को काव्यात्मक लय में पिरोने का एक सफल प्रयास है।


जैसा कि पुस्तक की भूमिका स्वयं कहती है—
"तीर्थ केवल स्थान नहीं होते, वे मन की यात्रा के पड़ाव होते हैं।" यह ग्रंथ इसी केंद्रीय भाव को लेकर चलता है, जहाँ कवि तीर्थों के भौगोलिक महत्त्व से ऊपर उठकर, उनसे जुड़े आत्मिक स्पर्श और ऊर्जा को शब्दबद्ध करता है। यह कृति राम की करुणा, शिव के सौम्य गर्जन और माँ शक्ति के तेज को समेटती हुई, सनातन की अखंड आत्मा का काव्यात्मक प्रवाह बन जाती है।

संरचना एवं विशिष्टता

पुस्तक की संरचना अत्यंत सुव्यवस्थित है, जिसे चार प्रमुख खंडों में विभाजित किया गया है: चार धाम, द्वादश ज्योतिर्लिंग, 51 शक्तिपीठ, और अन्य प्रमुख तीर्थ व दर्शनीय स्थल। इस विभाजन से पाठक को भारतीय तीर्थों के सम्पूर्ण कैनवास को समझने का अवसर मिलता है।

इस ग्रंथ की सबसे बड़ी विशिष्टता इसका 'आस्था और तथ्य का संतुलन' है। कविताओं के माध्यम से भावनात्मक और आध्यात्मिक यात्रा पूरी करने के बाद, प्रत्येक कविता के साथ दिया गया "स्थान परिचय" पाठक को उस स्थल के ऐतिहासिक, पौराणिक और भौगोलिक तथ्यों से अवगत कराता है। यह समावेश इस पुस्तक को एक साहित्यिक कृति के साथ-साथ एक प्रामाणिक आध्यात्मिक संदर्भ ग्रंथ भी बनाता है।

साहित्यिक और आध्यात्मिक गहराई

कवि नीरज कुमार वर्मा की भाषा प्राञ्जल (स्पष्ट) और शैली मनोग्राहिनी (आकर्षक) है। उनकी अभिव्यक्ति में एक सहज हृदयस्पर्शी भाव है, जो पाठक को सीधे भक्ति और जिज्ञासा के गहरे स्तर तक ले जाता है। कविताओं में संस्कृतनिष्ठ शब्दावली और लोक भाषा का सुंदर मेल दिखाई देता है, जिससे पाठकों के लिए एक सुखद अनुभव बनता है।

यह पुस्तक केवल धार्मिक लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि हर उस साहित्य-प्रेमी के लिए है जो कविता में इतिहास, संस्कृति और दार्शनिक चिंतन की तलाश करता है। 'काव्य-तीर्थ' सिद्ध करता है कि काव्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि आत्म-चिन्तन और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का एक सशक्त माध्यम है।

पूज्य जगद्गुरु जी का आशीर्वाद

इस कृति की गरिमा को पद्मविभूषण जगद्गुरु स्वामी श्री रामभद्राचार्य जी महाराज की मंगलमय शुभाशंसा ने और भी बढ़ा दिया है। जगद्गुरु जी ने स्वयं इस संग्रह का अवलोकन करने के बाद इसकी प्रशंसा करते हुए कहा है कि "कवि की कृति पूर्णतः भारतीय वैदिक-संस्कृति से ओतप्रोत है... अभिव्यक्ति सहृदय हृदयावर्जिका है।" एक शीर्ष आध्यात्मिक विभूति का यह समर्थन पुस्तक की प्रमाणिकता और साहित्यिक मूल्य को पुष्ट करता है।

निष्कर्ष

'काव्य-तीर्थ: 108 पवित्र स्थलों की आध्यात्मिक यात्रा' एक दुर्लभ संग्रह है, जो आधुनिक कविता में प्राचीन आस्था का संचार करता है। यह ग्रंथ स्वयं को समझने और ईश्वर के प्रति झुकने की एक पावन यात्रा है।

यह पुस्तक हर पुस्तकालय, हर घर और विशेषकर उन सभी पाठकों के लिए एक संग्रहणीय कृति है, जो अपनी जड़ों से जुड़कर, कविता के माध्यम से भारत की आध्यात्मिक आत्मा का अनुभव करना चाहते हैं। कवि नीरज कुमार वर्मा बधाई के पात्र हैं कि उन्होंने एक गहन आध्यात्मिक विषय को काव्यात्मक सरलता और तथ्यपरकता के साथ प्रस्तुत किया है।

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संक्षेप में, 'काव्य-तीर्थ' केवल एक किताब नहीं, बल्कि सनातन यात्रा का एक काव्यात्मक मानचित्र है।

समीक्षक: संदीप द्विवेदी

लेखक: नीरज कुमार वर्मा

विधा: कविता संग्रह/आध्यात्मिक साहित्य

प्रकाशन: असीम प्रकाशन

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