शिविर में आने का था उत्साह,
थोड़ा-सा जोश थोड़ी-सी उमंग थी,
किया प्रवेश उमंग और खुशी के साथ,
जब मिले सब उस्ताद,
लगा खड़ूस है सब,
जब मिला रगड़ा,
वह थोड़ा-सा हुआ दुःख आया थोड़ा-सा गुस्सा,
धीरे-धीरे आया समझ,
इन्हें भी करना काम बड़ा था,
फिर आया समझ,
मिट्टी को घड़े का आकार जो इन्हें देना था,
फिर आया समझ,
मजबूत घड़े के लिए मिट्टी को कुचलना तो पड़ेगा,
इन्हें भी करना काम बढ़ता।।
फिर आया समझ,
इन्हें पत्थर को मूर्ति का आकार जो देना था,
फिर आया समझ,
मजबूत मूर्ति निर्माण के लिए,
पत्थर को टूटना तो पड़ेगा,
इन्हें भी करना काम बड़ा था।।
फिर आया समझ,
इन्हें केडेट के व्यक्तित्व का निर्माण जो करना था,
इन्हें भी करना काम बड़ा था।।
जब मिले सब केंप अधिकारी,
जब सुनी उनकी वाणी,
हृदय हुआ गद् गद्,
उनके विचारों में देश प्रेम जो उमर रहा,
वर्तमान की भारत माता की व्यथा को जो उन्होंने बता दिया था,
फिर आया समझ,
इन्हें भी करना काम बड़ा था।।
फिर आया समझ इनका उद्देश्य,
स्वयं पर आई लज्जा हमको,
फिर आया समझ,
इन्हें भी करना काम बड़ा था।।
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देवी सिंह
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