नई दिल्ली/कौशांबी | राजनीति को अक्सर 'अनुभव' और 'सफेद बालों' का क्षेत्र माना जाता रहा है, लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों ने इस मिथक को तोड़ दिया। उत्तर प्रदेश की कौशांबी सीट से समाजवादी पार्टी के टिकट पर जीतकर आए पुष्पेंद्र सरोज आज न केवल संसद के सबसे युवा सदस्य हैं, बल्कि वे एक नई पीढ़ी की राजनीति का चेहरा बनकर उभरे हैं।
एक सरल
व्यक्तित्व: लंदन से लौटे, पर जमीन से जुड़े
पुष्पेंद्र सरोज की सबसे बड़ी खासियत
उनकी सादगी है। लंदन की क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी से अकाउंट्स और फाइनेंस में पढ़ाई
करने के बाद जब वे वापस भारत आए, तो उनके पास कॉर्पोरेट जगत के बड़े
पदों पर जाने का विकल्प था। लेकिन उन्होंने अपने क्षेत्र की जनता की सेवा को चुना।
इंटरव्यू के दौरान पुष्पेंद्र ने अपने ब्रिटेन के दिनों को याद करते हुए बताया कि वहां उन्होंने आत्मनिर्भरता का पाठ सीखा। उन्होंने साझा किया कि वे न केवल अपना खाना खुद बनाते थे, बल्कि उन्होंने वहां बर्तन धोने (Dishwashing) की नौकरी भी की। उनका मानना है कि कोई भी काम छोटा नहीं होता और उन अनुभवों ने उन्हें जीवन की कड़वी हकीकतों से रूबरू कराया।
संसद का पहला अनुभव: 'फील्ड ट्रिप' जैसा अहसास
जब संदीप द्विवेदी ने उनसे पूछा कि
पहली बार संसद की भव्य इमारत में प्रवेश करते समय उन्हें कैसा लगा, तो
पुष्पेंद्र ने बड़ी मासूमियत और ईमानदारी से जवाब दिया। उन्होंने कहा, "शुरुआत
में ऐसा लगा जैसे कोई नौजवान किसी फील्ड ट्रिप या पिकनिक पर आया हो। संसद की
चकाचौंध और वहां का माहौल देखकर मन में गर्व का अहसास था, लेकिन
सब कुछ बहुत नया और अकल्पनीय था।"
शिक्षा
पर केंद्रित विजन: 'क्वालिटी' सबसे
ऊपर
पुष्पेंद्र सरोज का मानना है कि
कौशांबी और पूरे प्रदेश की प्रगति का रास्ता शिक्षा से
होकर गुजरता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमें केवल 'क्वांटिटी' (संख्या)
पर नहीं बल्कि 'क्वालिटी' (गुणवत्ता)
पर ध्यान देना होगा। वे चाहते हैं कि उनके क्षेत्र के बच्चों को ऐसी शिक्षा मिले
कि वे दुनिया के किसी भी कोने में जाकर अपनी पहचान बना सकें। उन्होंने शिक्षा के
क्षेत्र में बड़े सुधारों की वकालत की है और इसे अपनी प्राथमिकता सूची में शीर्ष पर
रखा है।
साक्षात्कार के दौरान उन्होंने
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की कार्यशैली की जमकर प्रशंसा
की। पुष्पेंद्र ने एक महत्वपूर्ण किस्सा साझा करते हुए बताया कि कैसे एक गंभीर
मुद्दे पर अखिलेश जी ने उनसे राय मांगी और कहा, "तुम
बताओ क्या करना है, जो तुम कहोगे वही पार्टी
करेगी।" यह दर्शाता है कि सपा नेतृत्व अब
युवाओं की राय को कितनी गंभीरता से ले रहा है।
एक युवा सांसद के भीतर भी वही शौक
छिपे हैं जो आज के युवाओं के होते हैं। पुष्पेंद्र ने बताया कि वे शाहरुख
खान
के बहुत बड़े प्रशंसक हैं। फिल्मों और ओटीटी वेब
सीरीज में उनकी खासी दिलचस्पी है। खाने की बात चली तो उन्होंने बताया कि उन्हें
मां के हाथ की बनी मछली बहुत पसंद है। साथ ही, कौशांबी के स्थानीय स्वाद जैसे 'मुंगौड़ा' के
प्रति उनका प्रेम आज भी बरकरार है।
राजनीति
में 'जेन-जी' (Gen-Z) का
प्रवेश
पुष्पेंद्र सरोज का मानना है कि
राजनीति में अब तकनीक और नई सोच का समावेश होना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की 65% आबादी 35 वर्ष
से कम आयु की है,
ऐसे में नेतृत्व भी उसी ऊर्जा और तकनीक की समझ
रखने वाला होना चाहिए। वे एआई (AI) और सोशल मीडिया के दौर में राजनीति
को और अधिक पारदर्शी और सुलभ बनाना चाहते हैं।
नई
उम्मीदों का उदय
पुष्पेंद्र सरोज केवल एक राजनेता
नहीं, बल्कि
एक प्रेरणा हैं उन युवाओं के लिए जो देश बदलना चाहते हैं। लंदन की चकाचौंध को
छोड़कर कौशांबी की धूल-मिट्टी और 'नाली-खड़ंजे' की
समस्याओं के बीच काम करना उनके अडिग इरादों को दर्शाता है।
'द वूमनिया टाइम्स' के साथ
इस बातचीत में पुष्पेंद्र ने यह साफ कर दिया कि वे भले ही उम्र में छोटे हों, लेकिन
उनका विजन और देश के प्रति समर्पण बहुत बड़ा है। अब देखना यह होगा कि वे संसद में
अपने क्षेत्र की आवाज को कितनी मजबूती से उठाते हैं।



